Meaning of

शोअ'ला

Sho'ala • شعلہ

ज्वाला; आग; जुनून

flame; blaze; passion

شعلہ; آگ; جذبہ

Arabic

न डालो पाँव में बेड़ी, इसे तुम आगे बढ़ने दो
यही लड़की तुम्हें पहचान दुनिया में दिलाएगी

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देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है

गोर किस दिल-जले की है ये फ़लक
शो'ला इक सुब्ह यां से उठता है

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उस ने अच्छा ही किया हाल न पूछा दिल का
भड़क उठता तो ये शो'ला न दबाया जाता

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जल्वा-ए-नूर है ये दोनो आँखें उस की
उस को जलता सा शो'ला जो बना रखा है

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बस इन्हीं दोनों के क़िस्से आजकल हैं शहर में
इक मिरी प्यासी नज़र और इक तिरा शो'ला बदन

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मैं इक चिंगारी हूँ तू मुझ को इतना भी न छेड़ा कर
जो शो'ला बन गया गर तो ज़माना राख कर दूँगा

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जब ये शोला-दरून फटता है
ज़ीस्त फिर क्यूँ शरर नहीं होती

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हम को भी तो गाँव की शाम बुलाती है
लेकिन रोज़ी की बेड़ी कैसे खोले

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न डालो पाँव में बेड़ी, इसे तुम आगे बढ़ने दो
यही लड़की तुम्हें पहचान दुनिया में दिलाएगी

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देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है

गोर किस दिल-जले की है ये फ़लक
शो'ला इक सुब्ह यां से उठता है

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'शोअ'ला' शब्द एक जीवंत ज्वाला की छवि प्रस्तुत करता है, जो जीवन और ऊर्जा से भरपूर है। कविता में, यह अक्सर दिल और आत्मा को जलाने वाले प्रबल जुनून या तीव्र भावनाओं का प्रतीक होता है। ज्वाला की छवि विनाशकारी और प्रकाशमान दोनों होती है, जो प्रेम और इच्छा की द्वैत प्रकृति को दर्शाती है।

कवि 'शोअ'ला' का उपयोग प्रेम या क्रोध की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह इच्छा की भस्म करने वाली प्रकृति या किसी रहस्योद्घाटन की प्रकाशमान सच्चाई का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द शांति और स्थिरता के विपरीत होता है, अक्सर मानव भावनाओं की उथल-पुथल को उजागर करता है।

ज्वालाओं के नृत्य में, कवि जुनून और रहस्योद्घाटन का सार पाते हैं। 'शोअ'ला' हृदय की अग्निमय गहराइयों का एक शाश्वत प्रतीक बना रहता है।