Meaning of

आब-रू

aab-roo • آبرو

सम्मान; प्रतिष्ठा; गरिमा

honor; dignity; prestige

عزت; وقار; شان

Persian

लाज़मी हो आबरू-ए-इश्क़ ऐसा हो क़रीना
काश क़दमों में मैं सर रख सकता सुल्तान-ए-मदीना

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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे

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अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू-ए-शौक़
दम घुट रहा है वक़्त की रफ़्तार देख कर

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मुझ को तुम सेे इश्क़ नहीं नफ़रत भी नइँ
तुम ने दुनिया खो दी है मुझ को ही नइँ

खुले में मिलने से बचता रहता हूँ मैं
बात आब-रू की है जाँ उल्फ़त की नइँ

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हाँ 'इज़्ज़त-आबरू की तेरे शामत आने वाली है
किए पर दीन की तेरे बग़ावत आने वाली है

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चमन में जब भी गुलाब को हम निगाह-ए-उल्फ़त से देखते हैं
तो ख़ार सारे हमारी जानिब निगाह-ए-नफ़रत से देखते हैं

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इज़्ज़त-ओ-आबरू के डर से फिर इक वालिद ने
अपनी बेटी की मोहब्बत का गला घोंट दिया

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लाज़मी हो आबरू-ए-इश्क़ ऐसा हो क़रीना
काश क़दमों में मैं सर रख सकता सुल्तान-ए-मदीना

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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे

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आब-रू व्यक्ति की गरिमा और सम्मान का प्रतीक है, जो व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। कविता में, यह आत्म-सम्मान और सामाजिक दृष्टिकोण के बीच के नाजुक संतुलन को उभारता है।

कवि अक्सर आब-रू का उपयोग व्यक्तिगत अखंडता और सामाजिक निर्णय के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह व्यक्ति की आंतरिक शक्ति का माप हो सकता है या बाहरी ताकतों के प्रति संवेदनशील एक नाजुक मुखौटा।

आब-रू आत्मा का मूक संरक्षक है, सम्मान की निरंतर खोज का प्रमाण।