Meaning of

आह-ए-इश्क़

aah-e-ishq • آہ عشق

प्रेम की आह; प्रेम का विलाप

sigh of love; lament of passion

محبت کی آہ; عشق کا نوحہ

Persian

देखते हैं जो निगाह-ए-इश्क़ से 'चेतन'
फ़र्क तुझ
में और मुझ
में कर नहीं पाते

0

Download Image

अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

Download Image

ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं
सऊबतों से जो घबरा गए हों घर जाएँ

14

Download Image

सोज़-ए-वफ़ा के नाम से अरमान थे बहुत
लेकिन दयार -ए-इश्क़ से अंजान थे बहुत

लगता था उन्हें इश्क़ की राहें हैं मुनाकिद
आ कर के राह-ए-इश्क़ में हैरान थे बहुत

3

Download Image

ये राह-ए-इश्क़ है तारीक हो नहीं सकती
यहाँ चराग़ नहीं दिल जलाए जाते हैं

2

Download Image

वो राह-ए-इश्क़ में मुझ सेे कहीं बिछड़ा तो था
पर अब भी साथ चलता है मेरे साया बनकर

1

Download Image

गुनाह-ए-इश्क़ ने सिखला दिया है ये हुनर भी देख
जनाज़ा भी मेरा ही और कांधा भी है ख़ुद का ही

1

Download Image

ब-राह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा अब कहें भी क्या साहिल
मैं ने सहा न हो ऐसा कोई अजाब नहीं

1

Download Image

कैसे बताएँ कितने मिटे राह-ए-इश्क़ में
अपनी क़सम के बा'द भी लाखों सितम हुए

1

Download Image

हुस्न बोला जान की गर ख़ैरियत दरकार है
हज़रत-ए-दिल ख़ैमा-गाह-ए-इश्क़ में शामिल न हो

0

Download Image

देखते हैं जो निगाह-ए-इश्क़ से 'चेतन'
फ़र्क तुझ
में और मुझ
में कर नहीं पाते

0

Download Image

अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

Download Image

यह वाक्यांश उस गहरे, अक्सर अनकहे दुःख को पकड़ता है जो तीव्र प्रेम के साथ होता है। कविता में, यह एक दिल की मौन पुकार को व्यक्त करता है जो लालसा और इच्छा से भरा होता है। यह आह केवल एक सांस नहीं है, बल्कि अधूरी सपनों और दर्द भरी यादों का एक पात्र है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग अप्राप्त प्रेम की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर उन छंदों में प्रकट होता है जहाँ प्रेमी का दर्द गहरा लेकिन मौन होता है। शांत आह और दिल के दर्द की जोरदार आवाज के बीच का विरोधाभास एक सामान्य विषय है।

कविता के क्षेत्र में, 'आह-ए-इश्क़' प्रेम की परीक्षाओं के मौन लेकिन गहरे अभिव्यक्तियों का प्रमाण बना रहता है।