Meaning of

आह-ए-सोज़ाँ

aah-e-sozaan • آہ سوزاں

जलती हुई आह; तीव्र लालसा

burning sigh; intense longing

جلتی ہوئی آہ; شدید خواہش

Persian

आह-ए-सोज़ाँ एक ऐसी आह की छवि प्रस्तुत करता है जो अधूरी इच्छाओं की गर्मी से जलती है। कविता में, यह एक गहरे तरसते दिल का सार पकड़ता है, जहाँ आह दर्द और जुनून दोनों का प्रतीक बन जाती है।

कवि अक्सर 'आह-ए-सोज़ाँ' का उपयोग अप्राप्त प्रेम की गहराई या वियोग की पीड़ा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आत्मा की मौन पुकार का रूपक है, एक लालसा की फुसफुसाहट जो छंदों में गूंजती है।

जलती हुई आह की खामोशी में, कविता अपनी सबसे गहरी आवाज़ पाती है।