Meaning of

अकड़

akad • اکڑ

गर्व; अहंकार; अकड़

pride; arrogance; stiffness

غرور; تکبر; اکڑ

Hindi

दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा
तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया

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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी
इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी

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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन
कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब

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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया
मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया

दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा
तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया

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चल गया होगा पता ये आप को
बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को

इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
तू समझती क्या है अपने आप को

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मेरा हाथ पकड़ ले पागल, जंगल है
जितना भी रौशन हो जंगल, जंगल है

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नाप रहा था एक उदासी की गहराई
हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई

वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है
हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई

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जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है
वो लड़की राज़ नहीं है कोई पहेली है

हाँ मेरा हाथ पकड़ कर झटक दिया उस ने
सहारा दे के बताया कि तू अकेली है

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उस के हाथ में बाक़ी क्या रह जाता है
तुम ने जिस का हाथ पकड़ कर छोड़ दिया

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सर पकड़ कर डिग्रियों को देखता है नौजवाँ
मुल्क में इस वक़्त बेकारी बहुत मशहूर है

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दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा
तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया

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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी
इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी

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अकड़ एक कठोर गर्व की भावना को व्यक्त करता है, एक ऐसा रुख जो झुकने या समर्पण करने से इंकार करता है। कविता में, यह अक्सर आत्म-विश्वास और उसके नीचे छिपी असुरक्षा के बीच के आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है।

कवि अकड़ का उपयोग गर्व और पतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह किसी पात्र की जिद या अनियंत्रित अहंकार के दुखद परिणामों को चित्रित कर सकता है।

अकड़ हमें आत्मविश्वास और अहंकार के बीच की महीन रेखा की याद दिलाता है, एक संतुलन जो मानव चरित्र को परिभाषित करता है।