Meaning of

अश्क़

ashq • اشک

आँसू; भावना की बूंद

tear; drop of emotion

آنسو; جذبات کا قطرہ

Arabic

अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए
आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए

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जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

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अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है

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भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो

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ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल'
छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द

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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे

बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे

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अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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'अश्क़' का मूल अर्थ एक आँसू है, जो भावनाओं का भार लिए होता है। कविता में यह अव्यक्त दुःख, मौन आकांक्षा और आनंद व पीड़ा के बीच के नाजुक संतुलन का प्रतीक बन जाता है।

कवि अक्सर 'अश्क़' का उपयोग गहरी भावनात्मक परिदृश्यों को उभारने के लिए करते हैं। यह प्रेमी के मौन रोने, जुदाई के अव्यक्त दुःख, या पुनर्मिलन के खट्टे-मीठे आँसुओं का संकेत कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'अश्क़' केवल एक आँसू नहीं है; यह मानव असुरक्षा का सार और हृदय की गहरी भावनाओं की मौन गवाही है।