Meaning of

अश्क़ों

ashqon • اشکوں

आँसू; दुःख की बूँदें

tears; drops of sorrow

آنسو; غم کے قطرے

Arabic

जो इश्क़ में गिरते हैं हम तो
उन अश्कों को पी लेते हैं

वो दर्द भला क्या समझेंगे
जो दर्द हमेशा देते हैं

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए
आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए

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अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है

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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे

बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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अश्कों से आँख उस की कभी नम न हो
सारे ग़म मैं सहूँ पर उसे ग़म न हो

भैया तुम लोग बाबास ये माँगना
प्यार की आग मेरे कभी कम न हो

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बन के हँसी होंटों पर भी रहते हो
अश्कों में भी तुम बहते हो तुम भी ना

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यहाँ बे-फ़िक्र भी होना मना है
उठो अब चैन से सोना मना है

मिरे अश्कों को ये समझाए कोई
मैं लड़का हूँ मुझे रोना मना है

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धड़कन की हर सदा में है उलफ़त हुसैन की
जी करता है मैं देख लूँ सूरत हुसैन की

अश्कों से भीग जाता है दामन मेरा यहाँ
जब याद आती है यूँँ शहादत हुसैन की

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जो इश्क़ में गिरते हैं हम तो
उन अश्कों को पी लेते हैं

वो दर्द भला क्या समझेंगे
जो दर्द हमेशा देते हैं

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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मूल रूप से 'अश्कों' आँसुओं का भौतिक रूप है, जो अक्सर गहरे दुःख या प्रबल भावनाओं से जुड़ा होता है। कविता ने इस शब्द को दिल की मौन भाषा के रूप में अपनाया है, जहाँ आँसू अनकहे दुःख और गहरे प्रेम की बात करते हैं।

'अश्कों' का उपयोग कवि अक्सर अनकही भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी के मौन दुःख या दिल की शांत सहनशीलता का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द खुशी के विपरीत है, जो मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'अश्कों' आत्मा के सबसे अंतरंग स्वीकारों का माध्यम बन जाता है। यह मौन की शक्ति का प्रमाण है।