Meaning of

बहारा

bahaara • بہار

वसंत; खिलना; समृद्धि

spring; bloom; prosperity

بہار; کھلنا; خوشحالی

Persian

ख़्वाहिश है इन गुलों को दवामी बहार दूँ
जितने किए हैं इश्क़ सुख़न में उतार दूँ

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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

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भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है

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वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से

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दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया
उस ने मुझे बहार से महरूम कर दिया

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फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते

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अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़'
मानते हैं सब मिरे उस्ताद को

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रात यूँँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए

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हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली
न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी

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मैं ने आबाद किए कितने ही वीराने 'हफ़ीज़'
ज़िंदगी मेरी इक उजड़ी हुई महफ़िल ही सही

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ख़्वाहिश है इन गुलों को दवामी बहार दूँ
जितने किए हैं इश्क़ सुख़न में उतार दूँ

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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

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'बहारा' मूल रूप से वसंत ऋतु का संकेत देता है, जो नवीनीकरण और सुंदरता की छवियों को जागृत करता है। कविता में, यह जीवन के खिलने, सुंदरता की क्षणभंगुरता और नई शुरुआत के वादे का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'बहारा' का उपयोग जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता को पकड़ने के लिए करते हैं। यह युवावस्था और जीवन शक्ति का रूपक है, जो अक्सर क्षय और समय के गुजरने की अनिवार्यता के साथ विरोधाभास में होता है।

'बहारा' में, कवि जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता और नवीनीकरण के शाश्वत चक्र के बीच नाजुक संतुलन पाते हैं।