Meaning of

बहस-ए-फ़ुज़ूल

bahs-e-fuzool • بحث فضول

व्यर्थ चर्चा; निरर्थक विवाद

futile discussion; pointless argument

بے فائدہ بحث; لاحاصل جھگڑا

Arabic

अपने मूल अर्थ में, 'बहस-ए-फ़ुज़ूल' उन चर्चाओं को संदर्भित करता है जो कहीं नहीं पहुँचतीं, अक्सर ऊर्जा और समय की बर्बादी होती है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि मानव प्रयासों की व्यर्थता, उन अंतहीन बहसों का चक्र जो कोई फल नहीं देते, और ऐसे प्रयासों के बाद की थकान को दर्शाया जा सके।

'बहस-ए-फ़ुज़ूल' का उपयोग कवि अक्सर कुछ सामाजिक बहसों की बेतुकापन को उजागर करने के लिए करते हैं। यह तुच्छ मामलों पर अंतहीन तर्कों की छवि को उभार सकता है, उस शोर को जो सार्थक संवाद को डुबो देता है, या एक आत्मा की थकान को जो निरर्थक विवादों के चक्र में फंसी होती है।

कविता के क्षेत्र में, 'बहस-ए-फ़ुज़ूल' व्यर्थ प्रयासों पर खर्च की गई ऊर्जा की याद दिलाता है। यह मौन के मूल्य और समझदारी से लड़ाइयों को चुनने की बुद्धिमत्ता पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।