Meaning of

बंसरी

bansri • بنسری

बांसुरी; रागिनी

flute; melody

بانسری; نغمہ

Sanskrit

मुहब्बत वस्ल हिजरत राग सारे
मदन मोहन की बंसी गा रही है

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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है
हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है

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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा

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कान्हा होंगे लोग वहाँ के राधा होंगी बालाएँ
प्यार की बंसी बजती होगी हर समय हर ठाओं रे

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जीत ले दुनिया को बिन हथियार के
कृष्ण की बंसी में ऐसे राग हैं

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राधे-राधे मन ये बोले मोहन तुम समझाओ ना
तन्हा-तन्हा बैठे है हम बंसी ज़रा बजाओ ना

गोपी सारी रूठ गई है दरिया सूना-सूना है
दरिया से तुम मेल रचाकर गगरी को चटकाओ ना

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बात ये दिल की बतानी भी नहीं आती है
हम सेे तो बंसी बजानी भी नहीं आती है

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मुझे रहना वहाँ साया तुम्हारा है जहाँ माधव
निगाहें खोजती तुम को छुपे हो तुम कहाँ माधव

तुम्हारे होंठ बंसी के बसे दिल में सदा राधा
मगर पैरों की रेणू है जहाँ मीरा वहाँ माधव

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जिस बंसी से निकली थी उल्फ़त वाली धुन
वो दौर-ए-दुनिया में बे-हद आवश्यक है

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मुहब्बत वस्ल हिजरत राग सारे
मदन मोहन की बंसी गा रही है

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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है
हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है

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बांसुरी एक सरल पर गहन वाद्य यंत्र है, जो एक प्रकार की तड़प और शांति का आभास कराता है। कविता में यह अक्सर प्रकृति की आवाज़ या आत्मा के मौन गीत का प्रतीक होता है।

कवि 'बांसुरी' का उपयोग प्रेम के कोमल आह्वान या दिव्यता की फुसफुसाहट को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह स्थूल और सूक्ष्म के बीच अदृश्य संबंध का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

बांसुरी की धुन मौन और संगीत के बीच एक पुल है, सरलता में सुंदरता की कोमल याद दिलाती है।