Meaning of

बीम

beem • بیم

डर; चिंता

fear; anxiety

خوف; اضطراب

Persian

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया

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सब सेे बेज़ार हो गया हूँ मैं
ज़ेहनी बीमार हो गया हूँ मैं

कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझ में
या'नी अख़बार हो गया हूँ मैं

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एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं
हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है

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अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को

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बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

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पूरी तरह से अब के तय्यार हो के निकले
हम चारा-गर से मिलने बीमार हो के निकले

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पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं

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वो बस हँसी उस की नहीं उपचार था जैसे छिपा
बीमार के भी हाल को हम ने निखरते देखा है

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अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं

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उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया

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'बीम' शब्द एक बेचैनी और आशंका की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर मानव मन के उन छायादार कोनों का प्रतीक होता है जहाँ डर निवास करता है, सतह पर आने की प्रतीक्षा करता है। यह साहस और असुरक्षा के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है, जहाँ दिल कांपता है फिर भी आगे बढ़ता है।

'बीम' का उपयोग कवि पात्रों के आंतरिक संघर्ष को दर्शाने के लिए करते हैं। इसे अक्सर आशा के साथ विपरीत रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो कथा को आगे बढ़ाने वाला तनाव पैदा करता है। इस शब्द का उपयोग अज्ञात के डर, परिवर्तन के साथ आने वाले मौन भय को चित्रित करने के लिए भी किया जा सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'बीम' आत्मा के गहरे डर की एक फुसफुसाहट है। यह हमें भीतर की छायाओं का सामना करने के लिए आवश्यक साहस की याद दिलाता है।