Meaning of
बेहिस-ओ-मक्कार
behis-o-makkaar • بے حس و مکار
Hindi
संवेदनहीन और कपटी; कठोर और चालाक
English
insensitive and deceitful; callous and cunning
Urdu
بے حس اور مکار; سنگدل اور چالاک
Origin
Persian
Ash'aar
Nuance
‘बेहिस-ओ-मक्कार’ वाक्यांश भावनात्मक अलगाव और चालाक स्वभाव का मिश्रण प्रस्तुत करता है। कविता में, यह अक्सर मानव स्वभाव की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ एक व्यक्ति संवेदनहीन और चालाक दोनों हो सकता है, जिससे एक जटिल चरित्र बनता है जिस पर विश्वास करना कठिन होता है।
Poetic Usage
कवि 'बेहिस-ओ-मक्कार' का उपयोग उन पात्रों का वर्णन करने के लिए करते हैं जो भावनात्मक रूप से दूर होते हैं, फिर भी रणनीतिक रूप से चालाक होते हैं। यह अक्सर विश्वासघात या प्रेम के अंधेरे पक्षों की खोज करने वाले छंदों में दिखाई देता है।
Closing Insight
कविता में, 'बेहिस-ओ-मक्कार' मानव भावनाओं की जटिलताओं का दर्पण बनता है, उन छायाओं को प्रकट करता है जो अक्सर सतह के नीचे छिपी होती हैं।
