Meaning of

भीक

bheek • بھیک

दान; खैरात

alms; charity

خیرات; صدقہ

Sanskrit

ये इंसाँ भला भीख कैसे यहाँ माँग लेते हैं
मुझे तो ख़ुदा से दुआ माँगते शर्म आती है

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दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें
था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का

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मुझे पाना है गर तुझ को तो मिन्नत कर दुआएँ कर
कि मैं वो हूँ नहीं जो भीख में मिल जाऊँगा तुझ को

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मैं उस से भीख माँगूं तो मोहब्बत मिल भी सकती है
मगर कहती है ख़ुद्दारी मोहब्बत भीख की और तू

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भीक माँगी तो सुने काम के ता'ने मैं ने
काम माँगा तो कोई काम नहीं दे पाया

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मैं रक़्स क्यो न करूँ यार अपनी किस्मत पर
के भीख मिलती हैं जिस सेे वो दर तुम्हारा हैं

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हार गया दरवाज़े पर दस्तक दे दे कर
माँग रहा था एक फ़क़ीर मुहब्बत की भीख

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भीख ये हर साल मुझ को कम से कम दो बार दो
आँखों के कश्कोल को तुम भीख में दीदार दो

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भिखारी था नहीं पर भीख तक माँगी
किसी से साथ रहने के लिए मैं ने

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राह से भटके हुए हम घर भी छूटा सो अलग
बा'द में फिर रहज़नों ने हम को लूटा सो अलग

इस नगर में हम फ़क़ीरों की बुरी हालत हुई
भीख भी पाई नहीं कश्कोल टूटा सो अलग

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ये इंसाँ भला भीख कैसे यहाँ माँग लेते हैं
मुझे तो ख़ुदा से दुआ माँगते शर्म आती है

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दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें
था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का

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भीक अपने मूल में आवश्यकता या करुणा से देने या प्राप्त करने के कार्य का प्रतिनिधित्व करता है। कविता में, यह अक्सर विनम्रता, आवश्यकता की मानव स्थिति, या देने और प्राप्त करने में पाई जाने वाली कृपा का प्रतीक होता है।

कवि 'भीक' का उपयोग विनम्रता और मानव असुरक्षा के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह धन और गरीबी की सामाजिक गतिशीलता, या दान के कार्यों में पाई जाने वाली आध्यात्मिक समृद्धि को भी दर्शा सकता है।

भीक आवश्यकता और उदारता के बीच नाजुक संतुलन को दर्शाता है। यह हमें देने और प्राप्त करने दोनों में निहित कृपा की याद दिलाता है।