Meaning of
दहशत-ए-गुनाह
dahshat-e-gunaah • دہشت گناہ
Hindi
पाप का भय; गलत कार्य का डर
English
fear of sin; dread of wrongdoing
Urdu
گناہ کا خوف; غلطی کا ڈر
Origin
Arabic
Ash'aar
Nuance
दहशत-ए-गुनाह नैतिक उल्लंघनों से जुड़ी गहरी चिंता को पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर एक आत्मा की आंतरिक उथल-पुथल का प्रतीक होता है जो अपराधबोध और दिव्य प्रतिशोध के डर से जूझ रही होती है।
Poetic Usage
कवि दहशत-ए-गुनाह का उपयोग अपराधबोध और मोचन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह मानव दुर्बलता और शुद्धता की खोज के बीच संघर्ष को उजागर कर सकता है। यह वाक्यांश अक्सर पश्चाताप और नैतिक जागृति पर कविताओं में प्रकट होता है।
Closing Insight
दहशत-ए-गुनाह हमारे भीतर के नैतिक कम्पास की मार्मिक याद दिलाता है। यह धार्मिकता के लिए शाश्वत संघर्ष को व्यक्त करता है।
