Meaning of

दिल-ए-पाएमाल

dil-e-paayemaal • دل پامال

कुचला हुआ दिल; पीड़ित हृदय

heart trampled; heart oppressed

کچلا ہوا دل; مظلوم دل

Persian

शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है

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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है

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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता

108

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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र

60

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उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं

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कहीं ये सब्र खा जाए न हम को
किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं

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हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं
जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं

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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल

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इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ

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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

31

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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है

28

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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है

118

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दिल-ए-पाएमाल एक ऐसे दिल की छवि प्रस्तुत करता है जो कुचला गया है, दुःख और उत्पीड़न का भार उठाए हुए है। कविता में, यह गहरे भावनात्मक कष्ट का प्रतीक है, जहाँ दिल केवल भावनाओं का पात्र नहीं, बल्कि अनकहे दर्द का रणक्षेत्र है।

कवि अक्सर 'दिल-ए-पाएमाल' का उपयोग अप्राप्त प्रेम, विश्वासघात और चुपचाप सहन किए गए कष्टों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो आनंदित या संतुष्ट दिल को दर्शाते हैं, भावनात्मक घावों की गहराई को उजागर करते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'दिल-ए-पाएमाल' प्रतिकूलताओं के बीच मानव आत्मा की दृढ़ता का प्रमाण है।