Meaning of

हर-चंद

har-chand • ہر چند

यद्यपि; हालांकि

although; even though

اگرچہ; حالانکہ

Persian

नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए

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हर चंद कि हैं अदबार में हम
कहते हैं खुले बाज़ार में हम

हैं सब से बड़े संसार में हम
मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम

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इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है

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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए

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'हर-चंद' अपने मूल अर्थ में एक विरोधाभासी तथ्य की स्वीकृति या स्वीकार्यता को दर्शाता है। यह एक सूक्ष्म शब्द है, जो वक्ता को एक विरोधाभास या कोमल विरोधाभास प्रस्तुत करने की अनुमति देता है। कविता में, यह जटिल भावनात्मक ताने-बाने बुनने का साधन बन जाता है, जहाँ दिल एक सत्य को स्वीकार करता है फिर भी अपनी इच्छाओं को थामे रहता है।

कवि 'हर-चंद' का उपयोग स्वर या दृष्टिकोण में बदलाव लाने के लिए करते हैं। यह आंतरिक संघर्ष की अभिव्यक्ति या निराशा के खिलाफ आशा के विपरीतता की अनुमति देता है। अक्सर कठोर सत्यों के प्रभाव को कम करने या मानव आत्मा की दृढ़ता को उजागर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

शब्दों के नृत्य में, 'हर-चंद' एक कोमल धुरी है, दिल की विरोधाभासों को थामने की क्षमता की याद दिलाता है।