Meaning of
हिज्र-ए-साक़ी
hijr-e-saaqi • ہجر ساقی
Hindi
साक़ी से जुदाई; प्रिय के लिए तड़प
English
separation from the cupbearer; longing for the beloved
Urdu
ساقی سے جدائی; محبوب کے لئے تڑپ
Origin
Persian
Nuance
अपने मूल अर्थ में, 'हिज्र-ए-साक़ी' साक़ी से दूर होने के दर्द को दर्शाता है, जो प्रेम के प्याले को परोसने वाले प्रिय का रूपक है। कविता में, यह जुदाई एक ऐसी तड़प में बदल जाती है जो शारीरिक से परे जाकर आत्मा की मिलन की लालसा को छूती है।
Poetic Usage
'हिज्र-ए-साक़ी' का उपयोग कवि अक्सर जुदाई के गहरे दुःख को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आनंद की अनुपस्थिति, प्रिय के प्रस्थान से छोड़ी गई खाली जगह, या दिव्य प्रेम की आध्यात्मिक प्यास का प्रतीक हो सकता है।
Closing Insight
कविता के क्षेत्र में, 'हिज्र-ए-साक़ी' उस तड़प का सार पकड़ता है जो व्यक्तिगत और सार्वभौमिक दोनों है, प्रेम की स्थायी शक्ति का प्रमाण।