Meaning of

इंसाफ़

insaaf • انصاف

न्याय; निष्पक्षता

justice; fairness

انصاف; عدل

Arabic

तराज़ू कैसा है ये न्याय का जो
ग़रीबों की तरफ़ झुकता नहीं है

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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते

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कहने को तो है हुस्न भी इन्साफ़ का क़ाइल
ये सच है तो फिर चाहने वालों को कभी चाह

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हमारी वफ़ा का वो इंसाफ़ होगा
तिरी आँख से जब ये काजल छटेंगे

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ख़ुदा तेरे वजूद से इनकार नहीं है मुझ को
मगर सवाल तो तेरे इंसाफ-परस्त का है

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रहम, इंसाफ़ से ख़ाली जब हो ये दिल
फिर वो कुछ और ही है पर इंसाँ नहीं है

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ख़ुद ब ख़ुद बुझ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम के सब दिए
सब जलाएँ गर जो इंसाफ़- ओ- अदल का इक दिया

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करने लगा है कोई हिफा़ज़त जनाब की
ऊँची बनी है जबसे इमारत जनाब की

इंसाफ़ कैसे होगा भला आप सोचिये
जज भी जनाब के हैं अदालत जनाब की

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मोहब्बत को इबादत मानता हूँ मैं
ख़ुदा इंसाफ़ कर मेरी परस्तिश का

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पहली सफ़ में जो खड़े हैं क़त्ल का इंसाफ लेने
गर जो मुर्दा बोलता होता तो फिर सफ़ साफ होती

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तराज़ू कैसा है ये न्याय का जो
ग़रीबों की तरफ़ झुकता नहीं है

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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते

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'इंसाफ़' अपने मूल अर्थ में न्याय को एक दिव्य या नैतिक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत करता है। यह संतुलन और धर्म की भावना को जागृत करता है, जहाँ सत्य असत्य पर विजय प्राप्त करता है। कविता में, यह शब्द अक्सर उस मानव संघर्ष को गहराई से व्यक्त करता है जो असमानता से भरी दुनिया में निष्पक्षता की खोज करता है।

कवि अक्सर 'इंसाफ़' का उपयोग व्यक्तियों द्वारा सामना किए गए नैतिक दुविधाओं को उजागर करने के लिए करते हैं। यह प्रेम, समाज या व्यक्तिगत आत्मनिरीक्षण में न्याय की पुकार हो सकती है। यह शब्द विश्वासघात और अन्याय के विषयों के विपरीत, आशा के प्रकाशस्तंभ के रूप में कार्य करता है।

इंसाफ़ न्याय की अनंत खोज को मूर्त रूप देता है, एक ऐसा विषय जो मानव आत्मा के भीतर गहराई से गूंजता है।