Meaning of

इश्क़-ओ-उल्फ़त

ishq-o-ulfat • عشق و الفت

प्रेम और स्नेह; जुनून और कोमलता

love and affection; passion and tenderness

محبت اور الفت; جذبہ اور نرمی

Arabic

हो न इतनी भी ख़ुदस बे-ज़ारी
लगने लग जाए ज़िन्दगी भारी

लफ़्ज़ ये हो गए हैं बे-मानी
इश्क़-ओ-उलफ़त मोहब्बत-ओ-यारी

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लफ़्ज़ ये हो गए हैं बे-मा'ना
इश्क़-ओ-उल्फ़त मोहब्बत-ओ-यारी

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ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं
सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं

हाँ इक ऐसा दौर था जिस
में बातें ख़त्म न होती थीं
अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं

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मोहब्बत इश्क़-ओ-उल्फ़त से ये दिल अब भर गया है
मिरे अंदर जो आशिक़ था वो शायद मर गया है

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हो न इतनी भी ख़ुदस बे-ज़ारी
लगने लग जाए ज़िन्दगी भारी

लफ़्ज़ ये हो गए हैं बे-मानी
इश्क़-ओ-उलफ़त मोहब्बत-ओ-यारी

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लफ़्ज़ ये हो गए हैं बे-मा'ना
इश्क़-ओ-उल्फ़त मोहब्बत-ओ-यारी

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इश्क़-ओ-उल्फ़त एक गहरी भावनात्मक जुड़ाव की भावना को जगाता है, जहाँ प्रेम केवल स्नेह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक सर्वग्राही जुनून बन जाता है। कविता में, यह अक्सर प्रेमियों के बीच गहरे बंधन का प्रतीक होता है, जहाँ दिल की इच्छाएँ और कोमलता आपस में मिल जाती हैं।

कवियों ने 'इश्क़-ओ-उल्फ़त' का उपयोग रोमांटिक संबंधों की गहराई को खोजने के लिए किया है। यह अक्सर क्षणिक आकर्षणों के विपरीत होता है, स्थायी बंधनों पर जोर देता है। यह वाक्यांश भक्त और दिव्य के बीच आध्यात्मिक प्रेम को भी दर्शा सकता है।

कविता की दुनिया में, 'इश्क़-ओ-उल्फ़त' प्रेम और लालसा के अनंत नृत्य का प्रतीक है, जो दिल की असीम जुड़ाव की क्षमता का प्रमाण है।