Meaning of

जाँ-निसारी

jaan-nisaari • جان نثاری

आत्म-त्याग; समर्पण

self-sacrifice; devotion

خود قربانی; وفاداری

Persian

‘जाँ-निसारी’ का मूल भाव उस गहन क्रिया में है जहाँ व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह किसी उद्देश्य या प्रिय के लिए अर्पित कर देता है। कविता में, यह शब्द अंतिम समर्पण की छवियाँ उत्पन्न करता है, जहाँ स्वयं को किसी महानतर के लिए स्वेच्छा से समर्पित कर दिया जाता है।

कवियों द्वारा 'जाँ-निसारी' का प्रयोग अक्सर प्रेम या वफादारी के अंतिम कार्य को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह व्यक्ति की प्रतिबद्धता की गहराई का प्रमाण है। यह शब्द मात्र स्नेह के विपरीत है, जो सब कुछ त्यागने की तत्परता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'जाँ-निसारी' अंतिम समर्पण के प्रतीक के रूप में खड़ा है। यह हमें निःस्वार्थ प्रेम की सुंदरता की याद दिलाता है।