Meaning of

जानिब-ए-ग़ुरूर

jaanib-e-ghuroor • جانب غرور

अभिमान की ओर; घमंड की दिशा में

towards pride; in the direction of arrogance

غرور کی طرف; تکبر کی سمت

Persian

'जानिब-ए-ग़ुरूर' वाक्यांश अभिमान या घमंड की ओर बढ़ने की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर एक दिल या दिमाग की यात्रा का प्रतीक है जो आत्म-महत्व के आकर्षण से प्रभावित होता है। मूल अर्थ दिशात्मक है, लेकिन कवियों ने इसे ऐसी यात्रा के भावनात्मक और नैतिक प्रभावों की खोज के लिए विस्तारित किया है।

'जानिब-ए-ग़ुरूर' का उपयोग कवि विनम्रता और अभिमान के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह घमंड की मोहक प्रकृति को दर्शा सकता है। अक्सर इसे विनम्रता या सरलता के विपरीत रखा जाता है।

कविता में, 'जानिब-ए-ग़ुरूर' आत्मा की यात्रा को अभिमान की ओर या उससे दूर दर्शाने के लिए एक दर्पण के रूप में कार्य करता है। यह आत्म-विश्वास और विनम्रता के बीच नाजुक संतुलन को दर्शाता है।