Meaning of

जस्त

jast • جست

उछाल; छलांग; अचानक गति

leap; jump; sudden movement

اچھال; چھلانگ; اچانک حرکت

Persian

नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं
तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए

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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

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ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से
बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ

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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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पा सकेंगे न उम्र भर जिस को
जुस्तुजू आज भी उसी की है

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तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे
कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे

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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

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मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू
बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू

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तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी
ख़ुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तुजू करे

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नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं
तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए

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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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अपने मूल अर्थ में, 'जस्त' एक अचानक, ऊर्जावान गति का सार प्रस्तुत करता है। कविता ने इस शब्द को न केवल शारीरिक छलांगों के लिए बल्कि विश्वास की छलांगों, साहस के क्षणों और उन भावनात्मक उछालों के लिए भी अपनाया है जो हमें आगे बढ़ाते हैं।

'जस्त' का उपयोग कवि अक्सर परिवर्तन या रहस्योद्घाटन के क्षणों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह साधारण से अलगाव, अचानक अंतर्दृष्टि, या परिवर्तन को अपनाने के साहस को दर्शा सकता है।

कविता में, 'जस्त' साहस और परिवर्तन की भावना को समाहित करता है। यह हमें छलांग लगाने की शक्ति की याद दिलाता है, चाहे वह शाब्दिक हो या रूपक।