Meaning of

जुस्तजू

justajoo • جستجو

खोज; तलाश; अनुसंधान

search; quest; pursuit

تلاش; جستجو; کھوج

Persian

वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ

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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

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ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से
बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ

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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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पा सकेंगे न उम्र भर जिस को
जुस्तुजू आज भी उसी की है

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तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे
कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे

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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

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मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू
बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू

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तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी
ख़ुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तुजू करे

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वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ

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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही

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मूल रूप से, 'जुस्तजू' एक खोज या तलाश को दर्शाता है, जो अक्सर आंतरिक लालसा या इच्छा से प्रेरित होती है। कविता में, यह शारीरिक खोज से परे जाकर आत्मा की अर्थ, प्रेम, या सत्य की खोज को दर्शाता है, जो एक अनंत यात्रा को प्रतिबिंबित करता है।

कवि 'जुस्तजू' का उपयोग आदर्शों या सपनों की अथक खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसी यात्रा का सार पकड़ता है जिसका कोई निश्चित गंतव्य नहीं होता, जहाँ खोज की क्रिया ही संतोष का स्रोत बन जाती है।

'जुस्तजू' में, यात्रा ही गंतव्य है। यह इच्छा और खोज का नृत्य है।