Meaning of

काहिश-ए-फ़ुज़ूल

kaahish-e-fuzool • کاہش فضول

व्यर्थ इच्छा; निरर्थक लालसा

vain desire; futile longing

بے سود خواہش; بے فائدہ آرزو

Persian

'काहिश-ए-फ़ुज़ूल' शब्द उन इच्छाओं का सार पकड़ता है जो कहीं नहीं ले जातीं, एक ऐसी लालसा जो अधूरी रह जाती है। यह अप्राप्य के लिए तरसने की मानव प्रवृत्ति को दर्शाता है, कुछ प्रयासों की निरर्थकता को उजागर करता है। कविता में, यह कुछ सपनों की क्षणभंगुर प्रकृति की मार्मिक याद दिलाता है।

कवि अक्सर 'काहिश-ए-फ़ुज़ूल' का उपयोग अधूरे सपनों की उदासी को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे आशा और वास्तविकता के बीच के तनाव और उसके बाद होने वाली अनिवार्य निराशा का पता लगाने के लिए उद्धृत किया जाता है।

इच्छाओं के नृत्य में, 'काहिश-ए-फ़ुज़ूल' हमें लालसा में उलझी सुंदरता और दुःख की याद दिलाता है।