Meaning of

काज़ल

kaajal • کاجل

काजल; आँखों का श्रृंगार; सुंदरता का प्रतीक

kohl; eyeliner; metaphor for beauty

کاجل; آنکھوں کا سنگھار; خوبصورتی کی علامت

Sanskrit

लड़कियों के दुख अजब होते हैं सुख उस से अजीब
हँस रही हैं और काजल भीगता है साथ साथ

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
इश्क़ में पागल ही तो होना होता है
पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं

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जब से उस ने नम आँखों में काजल पहना है
उस राधा प्यारी ने मुझ को मोहन कहना है

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खींची जो उस ने आँख में काजल की इक लकीर
मैं ने भी अपने सीने पे इक हाथ रख लिया

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तुम्हारे अंदर छुपी हुई इक हसीन लड़की
ज़रा से काजल ज़रा सी लाली से मिल गई है

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं

47

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जो तुम बैठा लो आँखों में
मैं बैठूँ फिर काजल बनके

साड़ी सा पहनो मुझ को तुम
तब लहरूँ मैं आँचल बनके

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आँखों से आँसू चल निकले
पन्नों पर फिर काजल बिखरे

सारे के सारे ज्ञानी थे
बस हम ही थे पागल निकले

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पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह

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तुम्हारा काम इतना है कि बस काजल लगा लेना
तुम्हारी आँख की ख़ातिर नज़ारे मैं बनाऊँगा

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लड़कियों के दुख अजब होते हैं सुख उस से अजीब
हँस रही हैं और काजल भीगता है साथ साथ

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
इश्क़ में पागल ही तो होना होता है
पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं

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मूल रूप में 'काजल' आँखों के चारों ओर लगाया जाने वाला गहरा श्रृंगार है, जो उनकी आकर्षण को बढ़ाता है। कविता में, यह अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर दृष्टि की गहराई और रहस्य को प्रकट करता है, अक्सर सुंदरता की मोहक शक्ति का प्रतीक बनता है।

'काजल' का उपयोग कवि अक्सर प्रिय की मोहक आँखों का वर्णन करने के लिए करते हैं, काजल की गहराई और भावना की गहराई के बीच समानता खींचते हुए। यह बुरी नजर से बचाने वाले ताबीज का प्रतीक भी हो सकता है।

काजल सुंदरता के आकर्षण और रहस्य को समेटे हुए है, आत्मा की खिड़कियों का मौन रक्षक।