Meaning of
ख़ाक-ए-परेशाँ
khaak-e-pareshaan • خاک پریشاں
Hindi
बिखरी हुई धूल; अस्त-व्यस्त राख
English
scattered dust; disarrayed ashes
Urdu
بکھری ہوئی خاک; منتشر راکھ
Origin
Persian
Nuance
अपने मूल अर्थ में, 'ख़ाक-ए-परेशाँ' हवा द्वारा बिखरी धूल की छवि प्रस्तुत करता है, जो अराजकता और अस्त-व्यस्तता का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर मानव आत्मा के भीतर के उथल-पुथल या दुनिया की अव्यवस्थित स्थिति को दर्शाता है।
Poetic Usage
'ख़ाक-ए-परेशाँ' का उपयोग कवि आंतरिक अराजकता, अस्तित्वगत भ्रम, या भावनात्मक उथल-पुथल के बाद की स्थिति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह व्यवस्था और शांति की छवियों के विपरीत है।
Closing Insight
अपनी बिखरी हुई अवस्था में, 'ख़ाक-ए-परेशाँ' दिल की गहरी अव्यवस्था को संबोधित करता है। यह अराजकता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।