Meaning of

ख़ाक-ए-सियह

khaak-e-siyah • خاک سیاہ

काली धूल; राख

black dust; ashes

کالی خاک; راکھ

Persian

यह वाक्यांश वीरानी और कभी जीवंत रही चीज़ के अवशेषों की छवियाँ उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर विनाश के बाद या एक भावुक संबंध के अंत का प्रतीक होता है, जो केवल उन चीज़ों के निशान छोड़ता है जो कभी थीं।

'ख़ाक-ए-सियह' का उपयोग कवि हानि और शोक की भावना उत्पन्न करने के लिए करते हैं। यह सपनों के अंत, आशा के मुरझाने, या समय के अनिवार्य प्रवाह का प्रतिनिधित्व कर सकता है जो सब कुछ धूल में बदल देता है।

अपनी शांत वीरानी में, 'ख़ाक-ए-सियह' अंत और उन चीज़ों की मौन गूंज की बात करता है जो कभी थीं।