Meaning of

ख़लिश-ए-ख़ार

khalish-e-khaar • خلش خار

काँटे की चुभन; रूपकात्मक दर्द या जलन

prick of a thorn; metaphorical pain or irritation

کانٹے کی چبھن; استعاراتی درد یا جلن

Persian

‘ख़लिश-ए-ख़ार’ का शाब्दिक अर्थ काँटे की तीव्र चुभन है। कविता में यह एक रूपक बन जाता है, जो भावनात्मक या आध्यात्मिक जलन का प्रतीक है, एक सूक्ष्म लेकिन लगातार रहने वाली असुविधा जो दिल में बनी रहती है।

कवि अक्सर 'ख़लिश-ए-ख़ार' का उपयोग अधूरी प्रेम की चुभन को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अधूरी इच्छाओं की सूक्ष्म असुविधा या बेचैन आत्मा के मौन कष्ट का प्रतीक भी हो सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'ख़लिश-ए-ख़ार' दर्द और सुंदरता के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है, दिल की गहराई से महसूस करने की क्षमता की याद दिलाता है।