Meaning of

ख़र्च-ए-ज़बानी

kharch-e-zabaani • زہے قسمت

मौखिक खर्च; खाली बातें

verbal expenditure; empty talk

زبانی خرچ; خالی باتیں

Persian

अपने मूल अर्थ में, 'ख़र्च-ए-ज़बानी' उन शब्दों के खर्च को दर्शाता है जिनमें कोई सार नहीं होता। यह उस वाणी की निरर्थकता को पकड़ता है जो गहराई या ईमानदारी से रहित होती है। कविता में, यह शब्दों को मुद्रा की तरह बहते हुए दर्शाता है, लेकिन जिनका कोई वास्तविक मूल्य नहीं होता।

'ख़र्च-ए-ज़बानी' का उपयोग कवि असत्य संवाद की आलोचना के लिए करते हैं। यह अक्सर सच्ची भावनाओं वाले शब्दों के विपरीत होता है। यह शब्द राजनीतिक बयानबाजी या सतही वादों की खोखलापन को उजागर कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ख़र्च-ए-ज़बानी' शब्दों की शक्ति और जिम्मेदारी की याद दिलाता है। यह हमारे अभिव्यक्तियों की ईमानदारी पर चिंतन का निमंत्रण देता है।