Meaning of
ख़स-ओ-ख़ार-ओ-ख़ाशाक
khas-o-khaar-o-khaashaak. • خس و خار و خاشاک
Hindi
घास-फूस और कांटे और कचरा; बेकार चीज़ें
English
straw and thorns and debris; worthless things
Urdu
خس و خار و خاشاک; بے کار چیزیں
Origin
Persian
Nuance
‘ख़स-ओ-ख़ार-ओ-ख़ाशाक’ उजाड़ और उपेक्षा की छवियाँ उत्पन्न करता है, एक ऐसा परिदृश्य जो कभी था उसके अवशेषों से भरा हुआ है। कविता में, यह अक्सर तुच्छ और त्यागे हुए का प्रतीक होता है, जो मूल्यवान और प्रिय के विपरीत होता है।
Poetic Usage
कवि 'ख़स-ओ-ख़ार-ओ-ख़ाशाक' का उपयोग परित्याग और हानि की भावनाओं को उत्पन्न करने के लिए करते हैं। यह भौतिक खोजों की निरर्थकता या टूटे हुए सपने के अवशेषों को चित्रित कर सकता है। यह वाक्यांश अक्सर प्रचुरता और पूर्ति की छवियों के विपरीत होता है।
Closing Insight
‘ख़स-ओ-ख़ार-ओ-ख़ाशाक’ की गूंज में, व्यक्ति भूले हुए सपनों की मौन विलाप सुनता है।