Meaning of

ख़सारा

khasaara • خسارہ

हानि; घाटा

loss; deficit

نقصان; خسارہ

Arabic

ज़हर खा खा कर गुज़ारा कर रहे हैं आजकल
ज़िंदगी तुझ सेे किनारा कर रहे हैं आजकल

तू बहुत ही दिलनशीं है, महजबीं है तू मगर
तुझ को अपनाकर ख़सारा कर रहे हैं आजकल

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सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा

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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के

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लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं

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बिछती नहीं पलकें जहाँ अपना तुम्हारा होता है
इच्छाएँ जब जब बढ़ती हैं तब तब ख़सारा होता है

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ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा
इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

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किया है इश्क़ तो इस
में मुनाफ़ा क्या ख़सारा क्या
फ़क़त हम तो इसे ईनाम का उनवान देते हैं

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हमें ये इश्क़ उस से अब दुबारा तो नहीं होगा
मोहब्बत में हमें फिर से ख़सारा तो नहीं होगा

किया बर्बाद जी भर के मोहब्बत ने हमें 'अभिषेक'
मगर फिर भी मोहब्बत से किनारा तो नहीं होगा

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ख़ुद का हम कितना ख़सारा करते
हम अगर इश्क़ दुबारा करते

मुड़ के गर तुम ने जो देखा होता
रुकने का हम भी इशारा करते

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तुम्हारी बेवफ़ाई को ख़सारा हम नहीं करते
तुम्हें जब देखते हैं तो इशारा हम नहीं करते

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ज़हर खा खा कर गुज़ारा कर रहे हैं आजकल
ज़िंदगी तुझ सेे किनारा कर रहे हैं आजकल

तू बहुत ही दिलनशीं है, महजबीं है तू मगर
तुझ को अपनाकर ख़सारा कर रहे हैं आजकल

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सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा

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अपने मूल अर्थ में, 'ख़सारा' एक ठोस हानि या घाटे का विचार प्रस्तुत करता है, अक्सर वित्तीय संदर्भ में। लेकिन कविता में, यह शब्द अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर भावनात्मक या अस्तित्वगत हानि की गहरी भावना को व्यक्त करता है। यह अधूरी इच्छाओं के कारण छोड़े गए खालीपन या खोए हुए अवसरों के दुःख को पकड़ता है।

'ख़सारा' का उपयोग कवि अक्सर दिल की अमूर्त हानियों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक प्रेम के फीके पड़ने के बाद की खालीपन, बर्बाद समय के पछतावे, या अधूरे सपनों की उदासी का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द भौतिक लाभ के विपरीत है, भावनात्मक अनुभव की समृद्धि को उजागर करता है।

कविता में, 'ख़सारा' आत्मा की गहरी खालीपन को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सभी हानियाँ दिखाई नहीं देतीं, फिर भी वे हमारे आंतरिक संसार को गहराई से आकार देती हैं।