Meaning of
ख़ौफ़-ए-मीज़ान-ए-क़यामत
khauf-e-meezaan-e-qayaamat • خوف میزان قیامت
Hindi
क़यामत के दिन के तराज़ू का डर; ईश्वरीय न्याय की चिंता
English
fear of the balance of judgment day; anxiety of divine justice
Urdu
قیامت کے دن کے ترازو کا خوف; الٰہی انصاف کی فکر
Origin
Arabic
Nuance
अपने मूल अर्थ में, यह अंतिम न्याय के गहरे डर और प्रत्याशा को व्यक्त करता है, जब सभी कर्मों का तराज़ू में तौल होगा। कविता इसको और गहराई देती है, आंतरिक उथल-पुथल और अस्तित्वगत भय की खोज करके जो ऐसे हिसाब-किताब के साथ आता है।
Poetic Usage
कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग जवाबदेही और नैतिक आत्मनिरीक्षण के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह सांसारिक न्याय के विपरीत है, परमात्मा के अंतिम तराज़ू को उजागर करता है। यह व्यक्ति के कर्मों के भार से झुकते तराज़ू की छवि को उभारता है।
Closing Insight
कविता में, यह वाक्यांश आत्मा के गहरे डर और आशाओं को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह उस अंतिम संतुलन की याद दिलाता है जिसका हम सभी को सामना करना है।