Meaning of

ख़्वार-ओ-ज़बूँ

khwaar-o-zaboo'n • خوار و زبوں

अपमानित; नीचा दिखाया हुआ; दबा हुआ

humiliated; abased; downtrodden

ذلیل; پست; دبایا ہوا

Persian

ख़्वार-ओ-ज़बूँ एक गहरी भावना को जगाता है जिसमें व्यक्ति को आत्मा और स्थिति दोनों में नीचा दिखाया जाता है। मूल रूप से यह अपमान और असहायता की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ व्यक्ति की गरिमा छीन ली जाती है। कविता ने इस वाक्यांश को मानव निराशा की गहराईयों को खोजने के लिए अपनाया है, अक्सर इसे अतीत की महिमा या संभावित मुक्ति के क्षणों के साथ विपरीत किया जाता है।

कवि अक्सर 'ख़्वार-ओ-ज़बूँ' का उपयोग अनुग्रह से पतन को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह खोई हुई प्रतिष्ठा के दुःख को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस वाक्यांश का उपयोग अतीत की भव्यता और वर्तमान की दुर्दशा के बीच के अंतर को उजागर करने के लिए भी किया जा सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'ख़्वार-ओ-ज़बूँ' मानव गरिमा की नाजुकता को पकड़ता है। यह हमें सम्मान और अपमान के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।