Meaning of

कुतुब

kutub • کتب

पुस्तकें; धर्मग्रंथ

books; scriptures

کتابیں; صحیفے

Arabic

मर गए हम तो ये कत्बे पे लिखा जाएगा
सो गए आप ज़माने को जगाने वाले

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आज भी रौशन है जिस के दम से ये दीन-ए-ख़ुदा
मकतब-ए-इस्लाम में बस वो दिया ज़ैनब का है

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मकतब-ए-मुहब्बत में छुट्टियाँ नहीं होती
कुछ वो क़ुफ़्ल हैं जिन की चाबियाँ नहीं होती

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मकतब-ए-इश्क़ में दाख़िल हो अदब से 'साहिल'
क़ैस-ओ-फ़रहाद भी इस दर पे खड़े मिलते हैं

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इश्क़ में हारा तो पहले दिल मेरा पत्थर बना
फिर तुम्हारी याद ने कतबा बना डाला इसे

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चार भित्ति, ज़मीं, कुतुब, इक छत
कुछ गज़ाला के, कुछ सबा के ख़त

घर में क़ब्ज़ा जमा के बैठे हैं
हिज्र,मातम, चुभन, कसक, ख़ल्वत

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मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे

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मर गए हम तो ये कत्बे पे लिखा जाएगा
सो गए आप ज़माने को जगाने वाले

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आज भी रौशन है जिस के दम से ये दीन-ए-ख़ुदा
मकतब-ए-इस्लाम में बस वो दिया ज़ैनब का है

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'कुतुब' का मूल अर्थ पुस्तकों या लिखित कार्यों से है, विशेषकर पवित्र या विद्वतापूर्ण ग्रंथों से। कविता में, यह ज्ञान की विशालता और पृष्ठों में निहित मौन बुद्धिमत्ता को दर्शाता है।

'कुतुब' का प्रयोग कवि ज्ञान की खोज या परंपरा के भार को दर्शाने के लिए करते हैं। यह एकांत में पुस्तकों की मौन संगति का भी संकेत दे सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'कुतुब' ठोस और अमूर्त के बीच एक पुल बन जाता है, समय के प्रवाह का मौन साक्षी।