Meaning of

पामाल

paamaal • پامال

रौंदा हुआ; थका हुआ; दबा हुआ

trampled; worn out; downtrodden

پامال; تھکا ہوا; دبایا ہوا

Persian

भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है

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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता

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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र

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उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं

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अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते
उस का नंबर है मगर कॉल नहीं कर सकते

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कहीं ये सब्र खा जाए न हम को
किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं

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हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं
जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं

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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल

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इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ

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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है

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यह शब्द किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जिसे बार-बार दबाया या उपेक्षित किया गया हो। कविता में, यह जीवन के संघर्षों और थकान का प्रतीक है, जो परिस्थितियों से थक जाने की भावना को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'पामाल' का उपयोग दबे-कुचले या थके हुए आत्मा की दशा को वर्णित करने के लिए करते हैं। यह ताजगी या जीवन्तता को दर्शाने वाले शब्दों के विपरीत होता है, निराशा की गहराई को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'पामाल' जीवन के निरंतर बोझ की एक मार्मिक याद दिलाता है।