Meaning of

पर-ए-काह

par-e-kaah • پر کاہ

तिनके का पंख; महत्वहीन वस्तु

feather of straw; something insignificant

تنکے کا پر; غیر اہم چیز

Persian

यह वाक्यांश किसी ऐसी वस्तु की छवि प्रस्तुत करता है जो इतनी हल्की और महत्वहीन है कि उसे हल्की सी हवा भी उड़ा सकती है। कविता में, यह अक्सर मानव चिंताओं की नाजुकता या कुछ चिंताओं की तुच्छता का प्रतीक होता है।

कवि इसे भौतिक चिंताओं की तुच्छता को उजागर करने के लिए उपयोग करते हैं। यह भारी, अधिक ठोस छवियों के विपरीत होता है ताकि सांसारिक मामलों की क्षणभंगुरता को उजागर किया जा सके।

अपनी नाजुक छवि में, पर-ए-काह हमें हमारे सांसारिक संबंधों की क्षणभंगुरता की याद दिलाता है।