Meaning of

पयम्बर

payambar • پیغمبر

नबी; संदेशवाहक

prophet; messenger

نبی; پیغامبر

Arabic

क़ैस-ओ-फ़रहाद थे बहुत पहले
अब मोहब्बत के हम पयम्बर हैं

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

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जब बच्चों के हाथों वालिद की शामत आ जाएगी
पैगंबर ने फरमाया था कि कयामत आ जाएगी

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इक तरफ़ है तहरीक-ए-इबलीस, पर्तर तहरीक-ए-रब भी
जब हो हावी तहरीक-ए-इबलीस, फिर पैगम्बर आते है

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ये नस्ल-ए-आदम तो है फ़ितरतन जिद्दी, सुनती कब है
ख़ुदा को भी पड़ गए भेजने, पैग़म्बर हजारों

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पहले होते थे कभी पैग़म्बर
आजकल नक़ली ख़ुदा होते हैं

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वो इंसाॅं कैसे हो सकता जिसे इंसाॅं से नफ़रत है
वो मज़हब क्या न जिस
में बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है

कहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिल
ये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है

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कितने ही अवतार पयम्बर आए पर
धरती का दुख जैसा था वैसा ही है

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'क़ैस', 'फ़रहाद' और 'रांझा', 'शजर'
सब के सब इश्क़ के पयम्बर हैं

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क़ैस-ओ-फ़रहाद थे बहुत पहले
अब मोहब्बत के हम पयम्बर हैं

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

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'पयम्बर' शब्द एक दिव्य संदेशवाहक की छवि प्रस्तुत करता है, जो स्वर्गीय संदेशों का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर मार्गदर्शन, ज्ञान और दिव्यता से जुड़ाव का प्रतीक होता है।

कवि 'पयम्बर' का उपयोग आध्यात्मिक मार्गदर्शन और नैतिक अधिकार के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह मानवीय कमजोरी और दिव्य ज्ञान के बीच विरोधाभास भी प्रस्तुत कर सकता है।

कविता में, 'पयम्बर' पृथ्वी और दिव्यता के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है, उच्चतर सत्यों की याद दिलाता है।