Meaning of

पीर

peer • پیر

संत; आध्यात्मिक गुरु; बुजुर्ग

saint; spiritual guide; elder

پیر; روحانی رہنما; بزرگ

Persian

लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा

तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा

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रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया
जनवरी गुज़रा नहीं था और दिसंबर आ गया

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दिल ये करता है कि इस उम्र की पगडंडी पर
उलटे पैरों से चलूँ फिर वही लड़का हो जाऊँ

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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत
जिसे पैरों तले रौंदा गया है

तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म
तुम्हारा कौन सा अपना गया है

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निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की
सिलसिला बे-सबा रहा मेरा

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हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

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जो रख लो मुझ को दिल में तुम
रह लूँगा मैं पागल बनके

तुम मुझ को पहनो पैरों में
मैं खनकूँ फिर पायल बनके

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चिलचिलाती धूप है और पैर में चप्पल नहीं
जिस्म घाइल है मगर ये हौसला घाइल नहीं

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बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ
बिना सर पैर की बातें करेंगे

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तारीफ़ दशानन की किए जा रहे हैं जो
किस मुँह से सिया राम के पैरों में झुकेंगे

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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा

तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा

31

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रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया
जनवरी गुज़रा नहीं था और दिसंबर आ गया

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'पीर' शब्द एक बुद्धिमान बुजुर्ग या आध्यात्मिक गुरु की छवि प्रस्तुत करता है, जिन्हें अक्सर उनकी अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है। कविता में यह ज्ञान, आध्यात्मिक प्रबोधन और गहरे समझ की खोज का प्रतीक है।

कवि 'पीर' का उपयोग मार्गदर्शन और ज्ञान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अज्ञानता के विपरीत है, जो प्रबोधन और समझ की यात्रा को उजागर करता है।

काव्यिक परिदृश्य में, 'पीर' ज्ञान और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के प्रकाशस्तंभ के रूप में खड़ा है।