Meaning of

साहब-ए-जमाल

sahib-e-jamaal • صاحب جمال

सुंदरता का स्वामी; जो आकर्षण का प्रतीक हो

possessor of beauty; one who embodies grace

خوبصورتی کا مالک; جو دلکشی کا مظہر ہو

Persian

यह वाक्यांश उस व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जो न केवल बाहरी सुंदरता का धनी है, बल्कि आंतरिक आकर्षण से भी आत्मा को मोहित करता है। कविता में, यह अक्सर सौंदर्य और आध्यात्मिकता के आदर्श का प्रतीक होता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग उस प्रिय का वर्णन करने के लिए करते हैं जिसकी सुंदरता भौतिक क्षेत्र से परे है। इसे अक्सर सांसारिक अपूर्णताओं के विपरीत प्रस्तुत किया जाता है, जो एक अलौकिक गुण को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'साहब-ए-जमाल' आदर्श सुंदरता और आकर्षण का एक शाश्वत प्रतीक बना रहता है।