Meaning of

सराब

saraab • سراب

मृगतृष्णा; भ्रांति

mirage; illusion

سراب; فریب

Arabic

इक सराब-ए-राह में बे-क़रार ही रहा
मंज़िलों की चाह में इंतिज़ार ही रहा

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तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे
कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे

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हक़ीक़ी से हैं आश्ना मगर है ए'तिबार भी
हमें सराब ने रखा है ज़िंदा, आब ने नहीं

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झुलसते ख़ाब का सहरा है दिल
सराब हैं यहाँ दीवार के साए

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मुझ को भी है प्यास मुहब्बत की लेकिन
लडक़ी मुझ को सराब सी लगती है वो

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है सराबी आँख या फिर है हक़ीक़त कुछ बुरी सी
लग रहा दुनिया कि कमतर हो गई तासीर शायद

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सादगी मुझ
में नहीं, इंसान मैं भी हूँ हरामी
हाथ हो तेरा मिलाना झूठ, फ़र्ज़ी हो मिरा भी

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हम को कोई सराब मत देना
झूठा कोई भी ख़्वाब मत देना

रोज़ बस होंटों की हँसी दे दो
साल में इक गुलाब मत देना

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ये मत पूछो शे'र ग़ज़ल में किस का ज़िक्र है कौन लिखा है
अंतर्मन का शोर सराबा मैं ने अपना ये मौन लिखा है

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इक सराब-ए-राह में बे-क़रार ही रहा
मंज़िलों की चाह में इंतिज़ार ही रहा

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तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे
कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे

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'सराब' उन भ्रांतियों की क्षणभंगुर प्रकृति को दर्शाता है जो इंद्रियों को धोखा देती हैं। कविता में, यह अक्सर अप्राप्य इच्छाओं या सपनों का प्रतीक होता है जो क्षितिज पर चमकते हैं, हमेशा पहुँच से बाहर।

कवि 'सराब' का उपयोग लालसा और मोहभंग के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह कुछ मायावी के पीछा करने का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह वास्तविकता के विपरीत होता है, सपनों की नाजुकता को उजागर करता है।

'सराब' भ्रांतियों का नृत्य है, उन सपनों की याद दिलाता है जो हमारी पकड़ से परे चमकते हैं।