Meaning of

सरे-बाज़ार

sare-bazaar • سر بازار

बाज़ार में; सार्वजनिक रूप से

in the marketplace; publicly

بازار میں; عوامی طور پر

Persian

खा के चक्कर गिर गए थे कल सर-ए-बाज़ार में
और तब से होश में हम आ न पाए आज तक

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सर-ए-बाज़ार मैं उस की मोहब्बत को न बेचूँगा
किसी नाज़ुक परी के जिस्म से कपड़ा न खेचूँगा

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झूठ कहते हैं यहाँ बाजार में बिकता नहीं कुछ
बेसहारा को सर-ए-बाज़ार बिकते देखा मैं ने

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कुछ शिकायत है तो घर आओ कभी फ़ुर्सत में
मैं तमाशा सर-ए-बाज़ार नहीं कर सकता

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मुझे तो एक ये भी काम करना था
सर-ए-बाज़ार कुछ नीलाम करना था

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हुस्न को ले के खड़ा हूँ सर-ए-बाज़ार शजर
मिस्ल-ए-यूसुफ़ कोई मुझ को भी ख़रीदार मिले

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सर-ए-बाज़ार करते हैं नुमाइश अपने ज़ख़्मों की
कभी उस ने कहा था दिल को हल्का क्यूँँ नहीं करते

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अपनी बेटी को बताओ कि कनीज़-ए-ज़हरा
बे रिदा बर सर-ए-बाज़ार नहीं फिरती हैं

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इश्क़ का वो ऐसा कारोबार रखते हैं
हम से पहले दूसरा तैयार रखते हैं

दिल-लगी का शौक़ है कुछ इस क़दर उन को
मुन्तज़िर कितने सर-ए-बाज़ार रखते हैं

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खा के चक्कर गिर गए थे कल सर-ए-बाज़ार में
और तब से होश में हम आ न पाए आज तक

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सर-ए-बाज़ार मैं उस की मोहब्बत को न बेचूँगा
किसी नाज़ुक परी के जिस्म से कपड़ा न खेचूँगा

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'सरे-बाज़ार' मूल रूप से बाज़ार की हलचल भरी, खुली जगह को संदर्भित करता है। कविता में, यह सार्वजनिक दृष्टि में होने की असुरक्षा और खुलासे को पकड़ता है, जहाँ भावनाएँ और क्रियाएँ उजागर होती हैं।

कवि 'सरे-बाज़ार' का उपयोग खुलासे, असुरक्षा, और सार्वजनिक जीवन की कच्चाई के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर व्यक्तिगत स्थानों की गोपनीयता और अंतरंगता के विपरीत होता है।

कविता के क्षेत्र में, 'सरे-बाज़ार' खुलकर और असुरक्षित रूप से जीने के साहस का रूपक बन जाता है।