Meaning of

शब-ओ-रोज़

shab-o-roz • شب و روز

रात और दिन; लगातार; हमेशा

night and day; continuously; perpetually

شب و روز; مسلسل; ہمیشہ

Persian

लो सारे शहर के पत्थर समेट लाए हैं हम
कहाँ है हम को शब-ओ-रोज़ तौलने वाला

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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है
किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है

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वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ
वो शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल कहाँ

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बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे

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बिखरते-उलझते शबो-रोज़ कैसे गुज़ारें भला
थकन जिस्म की ज़िन्दगी बोल कैसे उतारें भला

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दर्द को गिनता रहता हूँ शब ओ रोज़
मुद्दतों बा'द कोई काम मिला है मुझ को

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तिरी इक नज़र के लिए भागता हूँ
शब-ओ-रोज़ सोता न ही जागता हूँ

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इश्क़ के फंदे से यहाँ डरते हैं लोग
लटका रहता हूँ मैं शब-ओ-रोज़ इस सेे

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लो सारे शहर के पत्थर समेट लाए हैं हम
कहाँ है हम को शब-ओ-रोज़ तौलने वाला

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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है
किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है

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शब-ओ-रोज़ समय के निरंतर प्रवाह को पकड़ता है, रात और दिन का चक्र जो जीवन को नियंत्रित करता है। कविता में, यह परिवर्तन की स्थिरता और अनिवार्यता का प्रतीक है, वह निरंतर गति जो अस्तित्व को आकार देती है। यह वाक्यांश निरंतरता का भाव उत्पन्न करता है, जीवन की वह अनंत धुन जो सब कुछ के बावजूद बनी रहती है।

कवि शब-ओ-रोज़ का उपयोग समय के प्रवाह और जीवन के चक्रों की स्थिरता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह सहनशीलता या प्रेम और लालसा की निरंतर प्रकृति को दर्शा सकता है।

शब-ओ-रोज़ समय के शाश्वत नृत्य को दर्शाता है, जीवन की अनंत यात्रा की याद दिलाता है।