Meaning of

शर्म-ए-गुनाह

sharm-e-gunaah • شرم گناہ

पाप की शर्म; अपराधबोध

shame of sin; guilt

گناہ کی شرم; جرم

Persian

'शर्म-ए-गुनाह' वाक्यांश उस गहरे अपराधबोध और नैतिक संघर्ष को पकड़ता है जो गलत कार्यों से उत्पन्न होता है। यह व्यक्ति के कर्मों और अंतरात्मा के बीच के आंतरिक संघर्ष को उभारता है, जो कविता में गहराई से खोजा गया विषय है। इस शर्म का भार अक्सर आत्मा पर एक भारी बोझ के रूप में चित्रित किया जाता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग पश्चाताप और मोक्ष के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह अक्सर मानव स्थिति, नैतिक अखंडता के संघर्ष और क्षमा की खोज का पता लगाने वाले छंदों में प्रकट होता है।

'शर्म-ए-गुनाह' वाक्यांश हमारे भीतर की नैतिक दिशा का मार्मिक अनुस्मारक है। यह मोक्ष की ओर कालातीत मानव यात्रा को दर्शाता है।