Meaning of

शौक-ए-बेदारी

shauk-e-bedaari • شوق بیداری

जागृति की इच्छा; चेतना की लालसा

desire for awakening; longing for awareness

بیداری کی خواہش; شعور کی تمنا

Persian

यह शब्द ज्ञान की लालसा को दर्शाता है, अज्ञानता की नींद से जागने की गहरी इच्छा। कविता में, यह अक्सर सत्य और समझ की बेचैन खोज का प्रतीक होता है, जो सांसारिकता से परे जाकर दिव्यता को छूता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग आध्यात्मिक जागृति और बौद्धिक जिज्ञासा के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह संतोष और अज्ञानता के विपरीत होता है, अक्सर साधारण से ऊपर उठने और गहरे सत्य की खोज करने का आह्वान करता है।

अपने सार में, 'शौक-ए-बेदारी' आत्मा को जागृत करने, समझ की रोशनी को खोजने और अपनाने का आह्वान है।