Meaning of

शहर-ए-ख़ामोशाँ

shehr-e-khaamoshaan • شہر خاموشاں

मौन का शहर; कब्रिस्तान का रूपक

city of silence; metaphor for graveyard

خاموشی کا شہر; قبرستان کا استعارہ

Persian

वो बस्ती न सहरा यहाँ अब
दिलो-जाँ हुए हैं फ़ुलाँ अब

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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है

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फ़लां ने कहा है फ़लाने से हैं हम
की हुलिए से देखो दिवाने से हैं हम

हैं सुनते नहीं हम किसी आदमी की
अलग कुछ कहाँ है? ज़माने से हैं हम

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मोहब्बत हर्फ़ अव्वल है इसी का मीम लिखते हैं
मोहब्बत आप हैं मेरी चलो तस्लीम लिखते हैं

लिखेंगे इक ग़ज़ल हम भी तुम्हारा ज़िक्र हो जिस
में
तुम्हारा ज़िक्र हो जिस
में वही हम थीम लिखते हैं

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फ़ुलाँ औरत किसी के इश्क़ में पागल हुई
कभी तुम ने सुना क्या क्योंकि ये मुमकिन नहीं

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जिस फ़लाने को आज अपना समझ रहे हो तुम
इक ज़माना था जब वो ही फ़लाँ हमारा था

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फलाँ ने फलाँ को ये क्या कह दिया
फलाँ के लिए मैं फलाँ हो गया

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मत करो ज़िद मेरी जाँ दिल में मेरे रहने की
शहर-ए-ख़ामोशाँ से ज़्यादा यहाँ ख़ामोशी है

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फलाँ लड़की फलाँ इंसाँ या आदमी की तरह
मैं ने बनना नहीं चाहा कभी किसी की तरह

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फलाँ तारीख़ को वो बातें जो की थी हम ने
वही काफ़ी हैं मिरे ज़ख़्म जलाने के लिए

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वो बस्ती न सहरा यहाँ अब
दिलो-जाँ हुए हैं फ़ुलाँ अब

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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है

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'शहर-ए-ख़ामोशाँ' वाक्यांश एक ऐसी जगह की भूतिया छवि को जागृत करता है जहाँ मौन सर्वोच्च होता है। यह जीवन की अंतिमता और सांसारिक संघर्षों के अंत के बाद की शांति का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'शहर-ए-ख़ामोशाँ' का उपयोग मृत्यु और जीवन के बाद की अनिवार्य मौनता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह अस्तित्व की क्षणभंगुर प्रकृति की मार्मिक याद दिलाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शहर-ए-ख़ामोशाँ' हम सभी को घेरने वाली मौन पर एक गंभीर ध्यान है। यह जीवन के शोर के परे प्रतीक्षारत शाश्वत शांति को व्यक्त करता है।