Meaning of

शेख़ी

shekhi • شیخی

डींग; घमंड; अहंकार

boast; brag; arrogance

شیخی; غرور; تکبر

Persian

'शेख़ी' उस गर्व का सार प्रस्तुत करता है जो अहंकार की सीमा पर होता है। यह किसी की उपलब्धियों या गुणों का डींग मारने वाला प्रदर्शन है। कविता में, यह अक्सर घमंड और गर्व की सतही प्रकृति की आलोचना के रूप में कार्य करता है। यह मोर की छवि को उभारता है, सुंदर फिर भी घमंडी।

कवि 'शेख़ी' का उपयोग अत्यधिक गर्व की मूर्खता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अहंकार के खिलाफ एक नैतिक पाठ के रूप में कार्य कर सकता है। यह शब्द अक्सर विनम्रता के विपरीत होता है, विनम्रता के गुण को उजागर करता है।

'शेख़ी' हमारी अपनी वैनिटी का आईना है। यह हमें गर्व और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।