Meaning of

शिकोह

shikoh • شکوہ

वैभव; भव्यता

splendor; grandeur

شان و شوکت; عظمت

Persian

फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक

17

Download Image

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

130

Download Image

वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक

67

Download Image

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

65

Download Image

कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से

35

Download Image

बैठ कर बात की और जुदा हो गए
कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं

32

Download Image

अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे

29

Download Image

'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

21

Download Image

पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा

20

Download Image

तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

19

Download Image

फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक

17

Download Image

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

130

Download Image

शिकोह भव्य सुंदरता और विस्मयकारी उपस्थिति का आभास कराता है। कविता में, यह अक्सर प्रकृति की भव्यता या मानव आत्मा की महानता का प्रतीक होता है, जो भव्यता के सार को पकड़ता है।

कवि 'शिकोह' का उपयोग शाही परिदृश्यों की छवियों को उभारने या किसी व्यक्ति के गरिमामय आभा का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह सादगी के विपरीत है, असाधारण और उदात्त को उजागर करता है।

शिकोह शाश्वत आकर्षण का प्रतीक है। यह पाठक को साधारण के परे की भव्यता को देखने के लिए आमंत्रित करता है।