Meaning of

शिकवा

shikwa • شکوہ

शिकायत; गिला; दुखभरा उलाहना

complaint; grievance; lament

شکایت; گلہ; دکھ بھرا شکوہ

Arabic

फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक

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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

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वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक

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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से

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बैठ कर बात की और जुदा हो गए
कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं

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अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे

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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

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पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा

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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक

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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

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शिकवा का मूल अर्थ असंतोष या शिकायत है, जो अक्सर किसी प्रिय या उच्च शक्ति की ओर निर्देशित होती है। कविता में, यह गहरे भावनात्मक उथल-पुथल और अधूरी इच्छाओं को व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है, जो लालसा और दुःख की तस्वीर पेश करता है।

कवि अक्सर 'शिकवा' का उपयोग भाग्य या दूर के प्रिय के खिलाफ दिल की गहरी शिकायतों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत और दिव्य के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है, जिससे कवि अन्याय और लालसा के विषयों का अन्वेषण कर सकते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'शिकवा' मानवीय स्थिति की एक मार्मिक अभिव्यक्ति बन जाता है, जहाँ लालसा और विलाप आपस में गुँथे होते हैं।