Meaning of

शोर-ए-फ़ुँग़ाँ

shor-e-funghaan • شور فغاں

विलाप का शोर; रोने की आवाज़

clamor of lamentation; wailing noise

فریاد کا شور; رونے کی آواز

Persian

‘शोर-ए-फ़ुँग़ाँ’ वाक्यांश विलाप की तीव्र और प्रबल ध्वनि को पकड़ता है। यह दुःख के उफान की छवियाँ बनाता है, जहाँ शोर स्वयं दुःख की कथा में एक पात्र बन जाता है। कविता में, यह केवल ध्वनि नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई है जो गूंजती है, निराशा की एक जीवंत तस्वीर बनाती है।

कवि ‘शोर-ए-फ़ुँग़ाँ’ का उपयोग दुःख के अराजकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं, अक्सर इसे मौन या शांति के विपरीत रखते हैं। यह एक दिल के आंतरिक उथल-पुथल या एक समुदाय के सामूहिक दुःख का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, ‘शोर-ए-फ़ुँग़ाँ’ उस शोर की एक मार्मिक याद दिलाता है जो दुःख हमारे भीतर और हमारे चारों ओर पैदा कर सकता है।