Meaning of
शोर-ए-तौक़-ओ-सलासिल
shor-e-tauq-o-salasil • شور طوق و سلاسل
Hindi
जंजीरों का शोर; बेड़ियों की आवाज़
English
clamor of chains; noise of shackles
Urdu
زنجیروں کا شور; بیڑیوں کی آواز
Origin
Persian
Nuance
शोर-ए-तौक़-ओ-सलासिल जंजीरों की कठोर और कर्कश ध्वनि को दर्शाता है, जो उत्पीड़न और कैद का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर आत्मा के संघर्ष या समाज की बाधाओं को दर्शाता है, प्रतिरोध और स्वतंत्रता की लालसा के विषयों के साथ गूंजता है।
Poetic Usage
कवि 'शोर-ए-तौक़-ओ-सलासिल' का उपयोग उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष को दर्शाने के लिए करते हैं। यह आंतरिक उथल-पुथल और मुक्ति के लिए संघर्ष का रूपक है।
Closing Insight
शोर-ए-तौक़-ओ-सलासिल बाधाओं के शोर के बीच स्वतंत्रता की निरंतर खोज को प्रतिध्वनित करता है।